तुम तो सच कहते हो मुझसे की तुम नहीं हो मेरे काबिल ... . मैं भी तो सच कह रहा तुमसे तुम फिर जिसके काबिल हो तो हो न संग उसके.... फिर ये शिकायत क्यूँ कर रहे तुम अब मेरे इस अकेलेपन से... तुम रहो अब आजाद और हमको न रहने दो ऐसे ही अकेला.. घबरा क्यों रहे अब तुम ये तुम्हारे ही चाहत थी न..!!🍂